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टीबी मुक्त झारखंड के लिए पंचायतों की भूमिका अहम
रांची, 14 अगस्त 2026। झारखंड को टीबी मुक्त झारखंड बनाने की दिशा में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन की ओर से अभियान को लगातार मजबूत किया जा रहा है। इसी क्रम में राष्ट्रीय स्वास्थ्य मिशन, झारखंड के अभियान निदेशक श्री शशि प्रकाश झा ने राज्यभर के सभी मुखियाओं और जनप्रतिनिधियों से टीबी उन्मूलन अभियान में सक्रिय सहयोग करने की अपील की है। उन्होंने कहा कि टीबी के खिलाफ लड़ाई को सफल बनाने में पंचायत और गांव स्तर पर जनप्रतिनिधियों की भूमिका बेहद महत्वपूर्ण है।
भारत सरकार के वर्ष 2030 तक टीबी उन्मूलन के लक्ष्य के तहत झारखंड में टीबी मुक्त भारत अभियान को तेजी से आगे बढ़ाया जा रहा है। अभियान का उद्देश्य केवल टीबी मरीजों की पहचान और इलाज तक सीमित नहीं है, बल्कि बीमारी की समय पर जांच, छिपे हुए मरीजों की पहचान, नियमित उपचार, पोषण सहायता और लोगों में जागरूकता बढ़ाना भी है।
अत्याधुनिक एक्स-रे मशीन से गांवों में टीबी स्क्रीनिंग
टीबी मुक्त झारखंड अभियान के तहत राज्य के गांवों और वार्डों में टीबी की स्क्रीनिंग को बेहतर बनाने के लिए अत्याधुनिक हैंड हेल्ड एक्स-रे मशीन का उपयोग किया जा रहा है। इस तकनीक के माध्यम से ऐसे लोगों की भी पहचान करने का प्रयास किया जा रहा है, जिनमें टीबी के स्पष्ट लक्षण दिखाई नहीं देते हैं।

ग्रामीण क्षेत्रों में टीबी की पहचान समय पर होना बेहद जरूरी है। कई बार शुरुआती चरण में मरीज को बीमारी का पता नहीं चलता और वह सामान्य जीवन जीता रहता है। ऐसे मामलों में स्क्रीनिंग के माध्यम से बीमारी की पहचान होने पर समय पर उपचार शुरू किया जा सकता है।
हैंड हेल्ड एक्स-रे जैसी तकनीक के गांवों तक पहुंचने से स्वास्थ्य विभाग को उन क्षेत्रों में भी जांच की सुविधा उपलब्ध कराने में मदद मिल रही है, जहां बड़े स्वास्थ्य केंद्रों तक पहुंच आसान नहीं है।
2025 में 67 हजार से ज्यादा मरीजों की पहचान
राज्य में टीबी की पहचान और उपचार को लेकर स्वास्थ्य विभाग की ओर से लगातार प्रयास किए जा रहे हैं। उपलब्ध आंकड़ों के अनुसार, वर्ष 2025 में झारखंड में 67,049 टीबी मरीजों की पहचान की गई और उनका निःशुल्क इलाज कराया गया।
वहीं जनवरी से जून 2026 के बीच राज्य में करीब 31,000 टीबी मरीजों की पहचान की गई है। इन मरीजों को स्वास्थ्य विभाग की ओर से निःशुल्क उपचार उपलब्ध कराया गया।
ये आंकड़े बताते हैं कि टीबी की जांच और मरीजों की पहचान के लिए राज्य में व्यापक स्तर पर अभियान चलाया जा रहा है। टीबी मुक्त झारखंड के लक्ष्य को हासिल करने के लिए आगे भी स्क्रीनिंग और उपचार की प्रक्रिया को मजबूत करने पर जोर दिया जा रहा है।
455 पंचायतें हो चुकी हैं टीबी मुक्त
टीबी उन्मूलन की दिशा में झारखंड ने एक महत्वपूर्ण उपलब्धि भी हासिल की है। अब तक राज्य की 455 पंचायतों को टीबी मुक्त घोषित किया जा चुका है।
पंचायतों को टीबी मुक्त बनाने की प्रक्रिया में स्थानीय स्तर पर बीमारी की पहचान, मरीजों का उपचार, जागरूकता और समुदाय की भागीदारी महत्वपूर्ण होती है। पंचायत स्तर पर जनप्रतिनिधियों के सहयोग से लोगों को जांच और इलाज के प्रति जागरूक करना आसान हो सकता है।
अभियान निदेशक ने इसी वजह से राज्य के सभी मुखियाओं से अपील की है कि वे अपने-अपने पंचायत क्षेत्रों में टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत करने में स्वास्थ्य विभाग का सहयोग करें।
मुखिया बनें नि-क्षय मित्र
टीबी मुक्त झारखंड अभियान को जनभागीदारी से जोड़ने के लिए अभियान निदेशक ने जनप्रतिनिधियों से नि-क्षय मित्र बनने की अपील की है। नि-क्षय मित्र के माध्यम से टीबी मरीजों को पोषण संबंधी सहायता उपलब्ध कराने में सहयोग किया जा सकता है।
टीबी के इलाज के दौरान मरीज के लिए पर्याप्त पोषण महत्वपूर्ण माना जाता है। ऐसे में समुदाय और जनप्रतिनिधियों की ओर से मरीजों को पोषण सहायता मिलने से उनके उपचार के दौरान मदद मिल सकती है।
मुखिया और अन्य जनप्रतिनिधि अपने क्षेत्र के लोगों को नि-क्षय मित्र बनने के लिए प्रेरित कर सकते हैं। इससे टीबी मरीजों के प्रति समाज में सहयोग और संवेदनशीलता की भावना को भी बढ़ावा मिलेगा।
हर महीने 24 तारीख को जांच के लिए जागरूक करें
अभियान निदेशक ने जनप्रतिनिधियों से लोगों को प्रत्येक महीने की 24 तारीख को स्वास्थ्य केंद्रों पर टीबी जांच और टेलीमेडिसिन सुविधा का लाभ उठाने के लिए जागरूक करने का भी आह्वान किया है।
पंचायत स्तर पर लोगों तक यह जानकारी पहुंचाना महत्वपूर्ण है, ताकि टीबी से जुड़े संभावित मरीज समय पर जांच करा सकें। ग्रामीण क्षेत्रों में मुखिया और अन्य स्थानीय जनप्रतिनिधि स्वास्थ्य विभाग की योजनाओं और सुविधाओं की जानकारी आम लोगों तक पहुंचाने में महत्वपूर्ण भूमिका निभा सकते हैं।
यदि किसी व्यक्ति में टीबी से संबंधित लक्षण या बीमारी की आशंका हो, तो उसे जांच और चिकित्सकीय सलाह के लिए स्वास्थ्य केंद्र तक पहुंचने के लिए प्रेरित किया जाना चाहिए।
जनभागीदारी से मजबूत होगा टीबी उन्मूलन अभियान
टीबी जैसी बीमारी के खिलाफ केवल स्वास्थ्य विभाग के प्रयास पर्याप्त नहीं होते। बीमारी की पहचान, उपचार पूरा कराने और जागरूकता फैलाने में समाज की भागीदारी भी जरूरी होती है। इसी उद्देश्य से टीबी मुक्त झारखंड अभियान में पंचायतों और जनप्रतिनिधियों को सक्रिय रूप से जोड़ा जा रहा है।
मुखिया अपने पंचायत क्षेत्र में लोगों को टीबी जांच के महत्व के बारे में बता सकते हैं। इसके साथ ही वे मरीजों को नियमित उपचार लेने और उपलब्ध स्वास्थ्य सुविधाओं का लाभ उठाने के लिए प्रोत्साहित कर सकते हैं।
गांव स्तर पर जागरूकता बढ़ने से बीमारी को लेकर फैली भ्रांतियों को कम करने में भी मदद मिल सकती है। लोगों को यह समझाना जरूरी है कि समय पर जांच और उचित उपचार से टीबी का इलाज संभव है।
टीबी मुक्त झारखंड के लक्ष्य की ओर बढ़ता राज्य
झारखंड में 455 पंचायतों का टीबी मुक्त घोषित होना अभियान की दिशा में एक महत्वपूर्ण उपलब्धि है। अब स्वास्थ्य विभाग का लक्ष्य अधिक से अधिक पंचायतों को इस अभियान से जोड़कर टीबी उन्मूलन की प्रक्रिया को और मजबूत करना है।
अत्याधुनिक स्क्रीनिंग तकनीक, निःशुल्क उपचार, टेलीमेडिसिन सुविधा और पोषण सहायता जैसे प्रयासों के साथ जनप्रतिनिधियों की भागीदारी इस अभियान को जमीनी स्तर तक पहुंचाने में मदद कर सकती है।
टीबी मुक्त झारखंड का लक्ष्य तभी प्रभावी रूप से हासिल किया जा सकता है, जब स्वास्थ्य विभाग, पंचायत प्रतिनिधि और आम नागरिक मिलकर काम करें। इसी उद्देश्य से अभियान निदेशक ने राज्यभर के मुखियाओं से आगे बढ़कर सहयोग करने की अपील की है।
पंचायत स्तर पर जागरूकता बनेगी अभियान की ताकत
राज्य के ग्रामीण क्षेत्रों में पंचायत प्रतिनिधियों की सीधी पहुंच लोगों तक होती है। ऐसे में टीबी मुक्त झारखंड अभियान की जानकारी घर-घर तक पहुंचाने में मुखियाओं की भूमिका अहम हो सकती है।
टीबी जांच के लिए लोगों को प्रेरित करना, नि-क्षय मित्र के रूप में सहयोग करना, मरीजों को पोषण सहायता उपलब्ध कराने में मदद करना और स्वास्थ्य केंद्रों की सुविधाओं के बारे में जानकारी देना—ये सभी प्रयास टीबी उन्मूलन अभियान को मजबूत बना सकते हैं।
स्वास्थ्य विभाग की इस अपील का उद्देश्य टीबी के खिलाफ चल रही मुहिम को केवल सरकारी अभियान न रखकर इसे जनभागीदारी का अभियान बनाना है। पंचायतों की सक्रिय भागीदारी से राज्य में टीबी की पहचान और उपचार को और बेहतर तरीके से आगे बढ़ाया जा सकता है।