मॉरिसस मे आजुवे के दिने पहुंचल रहे पहिला भोजपुरिया ( गिरमिटीया )

आजुवे के दिने ( 2 नवम्बर 1834 ) मॉरिसस मे भारत से भोजपुरिया लोगन के पहिला खेप एटलस जहाज से पहुंचल रहे । एग्रीमेंट के हिसाब से मजदूर लोग मॉरिसस पहुंचल रहे जे बाद मे ” गिरमिटिया ” के नाव से जानल जाला । 5 साल के कांट्रेक्ट ओह लोगन से भईल जे कलकत्ता मे ओह घरी नोकरी करत रहे , आ ब्रिटेन के ट्रेडिंग कम्पनी ” हंटर-आर्बुथ्नाट एंड कम्पनी ” संगे ई कांट्रेक्ट जवना के एग्रिमेंट कहल गईल बनल रहे ।
पहिला खेप मे उ लोग रहे जे बिहार आ पुर्वांचल से कलकत्ता मे नोकरी करत रहे आ ओह लो के बहुत कुछ देबे के वादा कई के ई एग्रिमेंट भईल रहे । ब्रिटेन के ई कम्पनी ओह घरी कलकत्ता आ मॉरिसस दुनो जगहा रहे आ ओकरा बिहार पुर्वांचल के लोग मजदूरी खाति नीमन बुझाईल ।
36 लोगन के पहिला टीम जवना के मेठ ” स्वरुप ” रहले आ उनुका संगे रहले सबराम । एह लो के संगे जाये वाला अउरी लोगन मे कुछ नाव रहे कैलाशचंद , दूखन , भुमराह , बुद्धू , बिगना , चम्पा , लुगन , बुद्धराम । कांट्रेक्ट बंगाली भाषा मे लिखल रहे जवना मे महीना के तनखाह मे मरदाना खाति 5 रुपया आ मेहरारुन खाति 4 रुपया रहे । मेठ के तनखाह 10 रुपया महीना आ मेठ के संगे जे रहे ओकर 8रुपया महीना तनखाह रहे ।ई यात्रा कलकत्ता पोर्ट से पोर्ट लुईस ( अप्रवासी घाट ) ले रहे ।
1834 से 1910 के बीचे 451796 लोग मॉरिसस गईल रहे जवना मे 346036 लोग मरदाना आ 105760 लोग मेहरारु रहे । तकरीबन 294257 लोग मारिसस मे रुकि गईल , जबकि 157539 लोग वापस भारत लवट आईल आ एहि मे से कुछ लोग दक्षिण अफ्रीका , ब्रिटिश गुयाना , त्रिनिदाद आ फिजी चल गईल ।
मॉरिसस मे पहुंचल इहे लोग आजुओ अपना भाषा अपना संस्कार के बना के रखले बा , आजूओ एह देस मे भोजपुरी के फेंड़ प हिन्दी के फर लागल बा ।
मॉरिसस में 2 नवम्बर के Arrival of Indentured Labourers Day कहल जाला आ आज के दिने ओजुगा स्कूल कॉलेज दफ्तर आदि जगहन प छुट्टी रहेला ।
बेरि बेरि नमन मेहनतकश समाज के ….